हर बात पे केहते हो के तू क्या है ....तुम्ही बता दो यह अंदाजे गुफ्तगू क्या हे
Sunday, March 16, 2014
Mausam ka jhonka
किसी मौसम का झोंका था जो इस दिवार पर लटकी हुई तस्वीर तिरछी कर गया हे
गए सावन में ये दीवारे यू सिली न थी न जाने इस दफा क्यों इनमे सीलन आ गयी हे
दरारे पड गयी हे... और सीलन इस तरह बहती हे जैसे खुस्क रुखसारों पे नीले आंसू चलते है
न दिन होता है अब ना रात होती हे सभी कुछ रुक गया हे...
किसी मौसम का झोंका था जो इस दिवार पर लटकी हुई तस्वीर तिरछी कर गया हे सी
गए सावन में ये दीवारे यू सिली न थी न जाने इस दफा क्यों इनमे सीलन आ गयी हे
दरारे पड गयी हे... और सीलन इस तरह बहती हे जैसे खुस्क रुखसारों पे नीले आंसू चलते है
न दिन होता है अब ना रात होती हे सभी कुछ रुक गया हे...
किसी मौसम का झोंका था जो इस दिवार पर लटकी हुई तस्वीर तिरछी कर गया हे सी
Kitabein
किताबे झांकती है बंद अलमारी के सीसे से
महीनो अब मुलाकात नहीं होती
जो शामे इनकी सोबतमें कटा करती थी
अब गुजरती है कंप्यूटर के पर्दो पर
बड़ी बेचैन रहती है किताबे
मगर वोह जो किताबों में मिला करते थे सूखे फूल
किताबे मागने ,गिरने उठने के बहाने रिस्ते बनते थे ...उनका क्या होगा
महीनो अब मुलाकात नहीं होती
जो शामे इनकी सोबतमें कटा करती थी
अब गुजरती है कंप्यूटर के पर्दो पर
बड़ी बेचैन रहती है किताबे
मगर वोह जो किताबों में मिला करते थे सूखे फूल
किताबे मागने ,गिरने उठने के बहाने रिस्ते बनते थे ...उनका क्या होगा
Ek Akela Is Sahar Mein ?
इन उम्र से लम्बी सड़कों को मंज़िल पे पहुंचते देखा नहीं
बस दौड़ती फिरती रहती हैं हमने तो ठहरते देखा नहीं
इस अजनबी से शहर में जाना पहचाना ढूंडता हैं एक अकेला इस शहर में ?
बस दौड़ती फिरती रहती हैं हमने तो ठहरते देखा नहीं
इस अजनबी से शहर में जाना पहचाना ढूंडता हैं एक अकेला इस शहर में ?
Maikade os bach ke nikalta he
कौन है कि जिसने मैं नहीं पि है.. मैकदे से जो बच के निकलता है
तेरी आँखों में डूब जाता हैं !
तेरी आँखों में डूब जाता हैं !
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